National Payment Corporation of India and aadhar enabled Payment System has changed the rule .
अगर आप AePS यूजर हैं , चाहे आप किसी भी कंपनी का AePS का इस्तेमाल करते हैं मतलब आप आधार से कस्टमर्स के पैसे का निकास या जांच करते हैं तो अब आप थोड़े परेशान हो सकते हैं ।
जब भी कोई ट्रांजेक्शन आधार से किया जाता है तो उस आधार को कैप्चर करने वाला AePS डिवाइस सीधा एनपीसीआई से जुड़कर ट्रांजेक्शन को वेरिफाई कर पूरा करता है। लेकिन अब एनपीसीआई के नए बदलाव के साथ यह नियम लागू किया गया है कि,
एक कस्टमर का , एक बार में सिर्फ एक ही ट्रांजेक्शन हो सकता है चाहे वो
बैलेंस इंक्वारी हो ,
मिनी स्टेटमेंट हो या
कैश विड्रॉल हो ,
अगर इनमे से कोई भी एक एक्शन के succes हो जाए या failed हो जाए और यूजर को फिर से कोई ट्रांजेक्शन करना है तो 30 के बाद ही दुबारा प्रयास किया जा सकेगा ।
30 मिनट के अंतराल के क्या फायदे हैं और क्या है नुकसान -
इस बड़े बदलाव के कुछ फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी , वैसे साफ लफ्जों में कहा जाए इससे यूजर्स और कस्टमर्स की परेशानियां और बढ़ने वाली है आइए जानते हैं कैसे -
अगर कोई वैसा कस्टमर जिसे अपने अकाउंट का बैलेंस पता नही है उसे पहले बैलेंस चेक करना है और उसने बैलेंस चेक कर लिया तो, उसके बाद विड्राल या मनी ट्रांसफर करने के लिए 30 मिनट का लंबा इंतजार करना पड़ेगा ।
अगर कोई भी ट्रांजेक्शन करते वक्त अगर ट्रांजेक्शन failed हो गया तब भी उसे दुबारा प्रयास करने के लिए 30 मिनट का इंतजार करना पड़ेगा।
मतलब कस्टमर्स की परेशानियां बढ़ने वाली हैं साथ ही साथ AePS यूजर्स को भी कस्टमर्स के ट्रांजेक्शन करने के लिए इंतजार करना पड़ेगा ।
बात करें इसके फायदे की तो ये सेफ्टी रीजन के चलते ऐसा बड़ा बदलाव किया गया है, अगर किसी का ट्रांजेक्शन फंस जाता है तो AePS यूजर्स उसे दुबारा प्रयास करते थे जिससे फिर से पैसे फंसने का डर होता था, अब वो ऐसा नहीं कर पाएंगे ।
आपको क्या कहना है इस बदलाव के बारे में, कमेंट करके हमे अपनी राय जरूर बताएं ।
✍🏻Zuber Alam
3 टिप्पणियां:
Ye news bahut bhadiya hai
Thnxx
म्स्त
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